श्मशान सबसे पवित्र स्थान, गुरूवर ने एक video में कहा था । प्राचीन काल से तंत्र के साधक श्मशान को एक साधना स्थान के रूप में प्रयोग करते आ रहे हैं ।
चाहे तारा पीठ का श्मशान हो या हरिश्चंद्र घाट ,या उज्जैन का महा श्मशान। तंत्र में गहन अनुसंधान करने वालों ने कुछ जगह चिन्हित की जैसे सरोवर के किनारे,नदी के तट पर ,पिपल वृक्ष के निचे,वट वृक्ष के निचे,बैल वृक्ष के नीचे,पहाड़ो पर ,जगल में आदि आदि ।
इनका फल भी अलग-अलग स्थान पर अलग अलग होता है । यहाँ चर्चा श्मशान की हो रही है । किन कारणों से इसे पवित्र व उत्तम स्थान कहा जाता है ।
श्मशान सबसे पवित्र स्थान
1- श्मशान मे सब एक समान हो जाते हैं न कोई बड़ा न छोटा ,न अमीर न गरीब सब का एक ही तरिके से अग्नि संस्कार होता है व पंच तत्व प्रकृति में वापिस मिल जाते हैं ।
2- ये स्थान मन में कुछ समय के लिए वैराग्य उत्पन्न करता है ।लोगों को वास्तविकता का आभास होता है कि एक दिन उनकी भी यही गती होगी ।
3- ये स्थान शिव व शक्ति (माँ काली ,तारा ,)से सीधा जुडा है ।मन में उनके प्रति भाव से सीधे जुडना यहाँ अधिक सरल है ।अधिकतर श्मशान में महाल भैरव व माँ काली का मंदिर जरूर होता है ।
4- यहाँ की शांती ,नीरवता ध्यान साधना के लिए उत्तम होती है ।बस आपको अपने भय को हटाना होता है ।अगर आप अपने आराध्य से जुड गये तो भय नहीं रहता है ।
5- यहाँ एक विशिष्ठ ऊर्जा पैदा होती है जिसका प्रयोग साधना के लिए सहयोग करता है लेकिन अगर आप गलत प्रयोग कर रहे हैं तो आपकी अधोगति होने से कोई नहीं बचा सकता है । ये आपके अपने उपर है कि उसका प्रयोग कैसे करते हैं।
6-यहाँ सुक्ष्म जगत का जमावड़ा रहता है ।इसमे सब तरह के मनुष्यों ल अन्य जगत के सुक्ष्म भी होते हैं ।अधिकतर हर सुक्ष्म पिंड के दाह होने तक वहाँ रहता है ।
साधना में इस जगत को समझने के लिए इनके मध्य रहकर इसको समझना आसन होता है ।
हर श्मशान का अपना श्मशान भैरव व श्मशान काली होती हैं ।जो वहाँ की व्यव्स्था के लिए उतरदायि होते हैं ।
7- यहाँ साधना बिना योग्य गुरू के कभी भी प्रारंभ नहीं करनी चाहिए। शक्ति सृजन करती है तो विध्वंस भी करती है । आपकी एक गलती आपके जीवन को खराब कर सकती है । ये स्थान वाममार्ग के लिए बना है ।
गृहस्थ को दक्षिण मार्ग से साधना करनी चाहिए। या फिर कोई योग्य गुरू मिल जाये तो उनके दिशानिर्देश में ही ये करें । जहाँ शिव व शक्ति की साधनाओं के लिए ये उत्तम स्थान है तो वहीं पर लोग इसका गलत प्रयोग भी करते हैं ।
गुरूवर का श्मशान को गंदा करने से तात्पर्य ये है कि लोग अपने स्वार्थ के लिए कुछ जादु टोने का प्रयोग भी यहाँ करते हैं जो समाज के लिए अमंगलकारी होता हैं ।
जिससे किसी को नुकसान पहुंचाया जाता है जो सनातन के विरूद्ध है । ऐसे लोग भूत ,प्रेत आदि आदि सिद्ध कर उन से काम करवाते हैं । कोई भी सनातनी परंपरा इसका स्वागत नहीं करती है ।
वैदिक तंत्र साधारण जादु टोने से कठिन होता है ।इसे सरलता से सिखा भी नहीं जा सकता है ये बहुत प्रभावशाली होता है । तंत्र का उदेश्य मोक्ष को शीध्र गती से प्राप्त करना ही है ।
आप अगर सिर्फ साधना ही करते हैं तो अनायास ही आपको स्वय कुछ सिद्धियाँ मिल जाती है । सिद्धियों के लिए विशिष्ठ साधनायें होती हैं जो योग्यता व आवश्यकता के अनुसार गुरू आपको निर्देशित करता है । अधिकतर लोग सिद्धि की लालसा से साधना करते हैं जो कई बार बहुत घातक होता है ।
हमें अपनी आध्यात्मिक उन्नति के लिए ही साधना करनी चाहिए न की सिद्धियों के लिए अनायास ही आपको सब मिल जाता है ।
सनातन में कई विधियों से इश्वर को समझने व प्राप्त करने का प्रयास किया परिणाम इसमें कई पंथ देखने को मिलते हैं ।
सबके मार्ग अलग है पर उदेश्य एक ।
श्री करौली शंकर महादेव की जय , गुरु बाबा की जय, गुरु माता कामख्या की जय …
हरिहर
